अध्याय 2: वापसी

एल्डोरिया का नाम सुनते ही चार्लट के भीतर यादों और पुराने ज़ख़्मों का सैलाब उमड़ पड़ा—मानो किसी ने उसके उस बीते हुए कल की सील लगी तिजोरी उचकाकर खोल दी हो, जिसे वह कब का भूल जाना चाहती थी। ब्रैड की नज़र से नज़र मिलाते ही उसकी आँखों में जद्दोजहद की एक झलक काँप गई।

“क्या ये काम कोई और कर सकता है?” उसने पूछा।

लेकिन ब्रैड का चेहरा सख़्त था। “ये रिसर्च इंस्टीट्यूट के भविष्य का सवाल है। मुझे तुम पर सबसे ज़्यादा भरोसा है।”

उधर, नोआ और एंडी पहले ही और पास खिसक आए थे—आँखें फैलाए, पूरी तरह चौकन्ने, बच्चों वाली उस खामोश गहनता के साथ हर शब्द को पीते हुए।

जुड़वाँ बच्चों ने एक-दूसरे को समझती हुई नज़र से देखा; उनकी आँखों में मुश्किल से दबाई जा सकने वाली उत्सुकता चमक उठी। एल्डोरिया—क्या वहीं उनका बरसों से गायब पिता रहता था? चार्लट का पेट ऐंठ गया; उसने अपनी ज़िंदगी के उस हिस्से को दफ़न रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश की थी। लेकिन नोआ और एंडी इतने समझदार थे कि बात छुपी नहीं रह सकी। टीवी पर जब उन्होंने जेम्स के बिज़नेस साम्राज्य की खबरें देखीं, तो उन्होंने जोड़-घटाना कर लिया—वे जेम्स से इतने मिलते थे, जैसे किसी ने बस कॉपी-पेस्ट कर दिया हो। उस वक़्त चार्लट ने मुट्ठियाँ भींच ली थीं, और पूछना चाहा था—पर ब्रैड ने गहरी साँस छोड़ दी।

“मैं तुम्हें एल्डोरिया वापस भेज रहा हूँ—परंपरागत जड़ी-बूटी वाली चिकित्सा पर फोकस करने के लिए,” वह आगे बोला। “इससे तुम्हारी मौजूदा कैंसर-ट्रीटमेंट रिसर्च को बहुत मदद मिल सकती है, और शायद तुम्हारा जो अटकाव है, वो भी टूट जाए।”

चार्लट ने होंठों को पतली लकीर में दबा लिया। इसी बीच एंडी उसकी टाँग से लिपट गया, बड़ी-बड़ी चमकती आँखों से ऊपर देखता हुआ। “मम्मी, हमें भी आपका मायका देखना है।”

“चलो ना, हम साथ में एल्डोरिया चलते हैं।”

नोआ ने उसकी दाईं टाँग पकड़कर मीठी आवाज़ में कहा, “मम्मी, चिंता मत करो। हम कोई शरारत नहीं करेंगे।”

चार्लट के चेहरे पर फिर वही खिंचाव उभरा—वह नोआ और एंडी की मनुहार को कभी मना नहीं कर पाती थी। ब्रैड के गंभीर चेहरे की ओर देखकर आखिरकार वह मान गई। उसकी आँखें नरम पड़ गईं—ममता और थकी हुई हार, दोनों साथ चमक उठे। वह झुककर बच्चों की आँखों के बराबर आई और धीमे से बोली, “ठीक है—पर वादा याद है ना? आज कोई शरारत नहीं। पक्का?”

नोआ की आँखें खूबसूरत अर्धचंद्र बन गईं; उसने ज़ोर-ज़ोर से सिर हिलाया। “मम्मी, हम अच्छे रहेंगे।”

चार्लट ने एक बनावटी मुस्कान ओढ़ ली और भीतर ही भीतर आह भरी। ‘जेम्स… क्या हम फिर मिलेंगे?’

चार्लट ने नोआ और एंडी के साथ सूटकेस पैक किए और दोपहर में एल्डोरिया जाने वाली फ्लाइट में बैठ गई। नोआ और एंडी खास तौर पर बेहद उत्साहित थे—पूरे रास्ते खिड़की से बाहर ही देखते रहे।

शाम ढलते-ढलते विमान उतरा। जैसे ही चार्लट टर्मिनल में कदम रखती है, घर-सी जानी-पहचानी ख़ुशबू ने उसे चारों ओर से घेर लिया। नॉस्टैल्जिया, राहत और एक अजीब-सी बेचैनी—सब एक साथ उठ पड़े; वापसी ऐसी थी जो सुकून भी दे रही थी और पराई भी लग रही थी।

एक हाथ से वह सूटकेस खींचती हुई नीचे देखकर नोआ और एंडी को याद दिलाने लगी, “एयरपोर्ट पर बहुत भीड़ है। मेरे पास-पास रहना, कहीं खो मत जाना।”

एंडी ने बार-बार सिर हिलाया। बच्चा जिज्ञासा से आँखें फैलाए इधर-उधर देखने लगा, माँ की बाँह खींची और आगे शोर करती भीड़ की तरफ इशारा किया। “मम्मी, वो लोग वहाँ क्या कर रहे हैं?” उसने हैरानी से चमकती आवाज़ में पूछा।

चार्लट ने सहज ही ऊपर देखा—और उसकी मुस्कान उसी पल जम गई। भीड़ के बीच भी वह उस घेरे के बीच खड़े आदमी को तुरंत पहचान गई।

वह जेम्स था! छह सालों ने उसे बदल दिया था—वही तेज़ नक्श, पर अब आत्मविश्वास और अनुभव के शांत बोझ से और नुकीले, और तराशे हुए। वह सिर्फ़ हैंडसम नहीं लग रहा था, बल्कि रौबदार—जैसे समय ने उसे बदला नहीं, निखार दिया हो।

अगर वह कभी तेज़ धार वाला खंजर रहा होता, तो अब वह म्यान में बंद तलवार जैसा लगता था—अपनी असली धार छिपाए हुए। उसने काला ट्रेंच कोट पहन रखा था। उनके चारों ओर रिपोर्टरों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, कैमरों की फ्लैश एक न थमने वाले उजाले के तूफ़ान की तरह चमक रही थी। जेम्स के बगल में डेज़ी हल्की गुलाबी ड्रेस में खड़ी थी; उसकी शांत मुस्कान हर लेंस को अपनी तरफ खींच रही थी। दोनों साथ में बिल्कुल बेदाग़ लग रहे थे—कुछ ज़्यादा ही बेदाग़, मानो यह परफ़ेक्शन भी इस तमाशे का हिस्सा हो। एक बेहद आकर्षक जोड़ी।

एक रिपोर्टर ने उत्साह से पूछा, “मिस्टर मार्टिन, अफ़वाह है कि आपकी और मिस लिन की शादी जल्द होने वाली है। शादी कब है?”

यह सुनते ही डेज़ी के गाल हल्के से गर्म हो गए और वह अनायास जेम्स की बाँह पकड़ने को बढ़ी—लेकिन उससे पहले ही जेम्स खिसक गया, उसकी पकड़ से बचते हुए। डेज़ी की आँखों में क्षण भर के लिए असहजता की परछाईं आई और लगभग तुरंत ही गायब भी हो गई। उसने जल्दी से खुद को संभाला और शालीनता से बोली, “सब लोग थोड़ा धैर्य रखिए। जेम्स और मैं अभी युवा हैं; फिलहाल हम अपने करियर पर ध्यान दे रहे हैं। लेकिन जैसे ही शादी की बातें पक्की होंगी, हम आपको ज़रूर बताएँगे।”

डेज़ी जहाँ अपनी अभ्यास की हुई मुस्कान से रिपोर्टरों को आसानी से रिझा रही थी, वहीं जेम्स का चेहरा पत्थर जैसा निर्विकार बना रहा—उसकी चुप्पी वह सब कह रही थी, जिसे डेज़ी का हँसता चेहरा छिपाना चाहता था।

पास ही शार्लोट खड़ी थी, सब कुछ देखती-सुनती हुई, और उसके भीतर खट्टा-सा एहसास चुपचाप फैलता जा रहा था।

क्या वे सचमुच अब शादी करने वाले थे?

विदेश में भी शार्लोट जेम्स की मौजूदगी से नहीं बच सकी थी—कभी-कभी खबरों में उसका नाम और तस्वीर उभर ही आते। हर गाला, हर इंटरव्यू में डेज़ी उसके साथ खड़ी होती, दोनों की मुस्कानें तराशी हुई परफ़ेक्शन जैसी, मीडिया की पसंदीदा “प्यार की तस्वीर”—और सब उनकी भव्य शादी का इंतज़ार करते। मगर शार्लोट, जो तीन साल से मिसेज़ मार्टिन थी, एक बार भी जेम्स के साथ सार्वजनिक रूप से नहीं दिखी थी।

शार्लोट की मुट्ठियाँ कस गईं, यहाँ तक कि नाखून उसकी हथेलियों में चुभने लगे। हर साँस में वही झुंझलाहट भारी थी, जिसे वह समझती थी कि कब का छोड़ चुकी है। अगर वह सच में आगे बढ़ गई थी, तो मन के भीतर यह कड़वाहट अब भी क्यों धड़क रही थी?

शार्लोट ने नीचे देखा—नोआ और एंडी की निगाहें जेम्स पर टिकी थीं—और उसके भीतर बेचैनी की लहर दौड़ गई। “नोआ, एंडी, चलो!”

वह दोनों बच्चों को उनके विरोध करने से पहले ही झटपट अपने साथ ले गई, उसके कदमों में जल्दबाज़ी की तात्कालिकता थी। शार्लोट का दिल सिकुड़ गया—वह यह सोच भी नहीं सह पा रही थी कि उनकी छोटी-सी उम्र के कानों ने उस बातचीत का कितना हिस्सा सुन लिया होगा।

अपने पिता को किसी दूसरी औरत से शादी की तैयारी करते देखना—उनके नाज़ुक दिलों पर कितना भारी पड़ता।

नोआ और एंडी बार-बार पीछे मुड़कर देख रहे थे, जैसे जेम्स का चेहरा याद में उतार लेना चाहते हों। उधर, मीडिया से तंग आकर जेम्स के भीतर चिढ़ की लहर उठी। उसकी नज़रें भीड़ में घूमीं और अचानक उसने एक औरत को जल्दबाज़ी में दूर जाते देखा। उसकी पुतलियाँ उसी पल सिकुड़ गईं।

वह आकृति—इतनी जानी-पहचानी कि उसका दिल उछलकर गले में आ गया—शार्लोट जैसी लग रही थी। दिमाग को बीच में आने का मौका ही नहीं मिला; जेम्स भीड़ को चीरता हुआ आगे बढ़ चुका था, सोच से नहीं, सहज प्रवृत्ति से खिंचता हुआ—शार्लोट के पीछे। लेकिन एयरपोर्ट बहुत विशाल था, और जब तक वह बाहर पहुँचा, शार्लोट अफ़रा-तफ़री में कहीं खो चुकी थी—उसकी तलाश में उसे बस चेहरों का बेचैन समंदर मिला। उसकी आँखों में चमकी वह क्षणिक रोशनी बुझ गई, और उसकी जगह ठंडी, खाली निगाह आ गई, जिसमें कसैला आत्म-उपहास घुला था।

वह क्या सोच रहा था? शार्लोट अचानक वापस कैसे आ सकती थी? वह इतनी बेदिल थी कि अपने ही बच्चों को छोड़कर चली गई!

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